Hundreds of banners and posters used to oppose Punjab Government
चंडीगढ़, 8 अक्टूबर : भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने वाली अवैध और आपत्तिजनक सोशल मीडिया सामग्री पर सख्त कार्रवाई करते हुए, पंजाब पुलिस ने आज राज्य के विभिन्न जिलों में सौ से अधिक सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ प्राप्त शिकायतों के आधार पर कई एफआईआर दर्ज की हैं।
इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि सोशल मीडिया पर उच्च संवैधानिक अथॉरिटी पर हमले, जाति आधारित अपमान और भड़काऊ सामग्री, तथा जातीय और साम्प्रदायिक भावनाओं को अनुचित ढंग से प्रस्तुत कर शांति और सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की प्रत्यक्ष कोशिश से जुड़ी सामग्री को फलैग किया गया है और कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि इन पोस्टों और वीडियोज़ में जातिवाद और नफरत भरी सामग्री शामिल है, जिसका उद्देश्य सामाजिक फूट डालना, सार्वजनिक व्यवस्था भंग करना और न्यायिक संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुँचाना है।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि इस सोशल मीडिया सामग्री में भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश की साख को ठेस पहुँचाने वाली अवैध और आपत्तिजनक बातें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सोशल मीडिया पोस्टों में हिंसा भड़काने, संवैधानिक पद को निशाना बनाने, अनुसूचित जाति के सदस्य को जानबूझकर डराने और अपमानित करने के इरादे वाली बातें, अनुसूचित जाति के एक सदस्य के खिलाफ दुश्मनी, नफरत और भेदभावपूर्ण सोच को प्रोत्साहित करने की कोशिशें, जाति के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने और शांति भंग करने के इरादे से किए गए अपमानजनक और सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान शामिल हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि गंभीर अपराधों से संबंधित प्राप्त जानकारी के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(आर), 3(1)(एस) और 3(1)(यू) तथा भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 196, 352, 353(1), 353(2) और 61 के अंतर्गत विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।
उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार इन एफआईआर की आगामी जांच की जा रही है।
