पंजाबी फिल्म निर्माता और अभिनेता गिप्पी ग्रेवाल को अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना अकाल से बहुत उम्मीदें थीं।
पंजाबी अभिनेता और फिल्मकार गिप्पी ग्रेवाल को अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘अकाल’ से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन यह फिल्म रिलीज़ के बाद भारी विवादों में घिर गई। कई सिख संगठनों ने फिल्म के विरोध में प्रदर्शन किए और कुछ सिनेमाघरों में इसके प्रदर्शन को रुकवाने की मांग की। विरोध इतना बढ़ गया कि गिप्पी ग्रेवाल ने घोषणा कर दी कि वह अब सिखों से संबंधित किसी भी विषय पर फिल्म नहीं बनाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, फिल्म पर लगभग ₹20 से ₹22 करोड़ का बजट खर्च हुआ था, लेकिन अब तक यह फिल्म केवल ₹8 से ₹9 करोड़ की कमाई ही कर पाई है, जिससे निर्माताओं को बड़ा घाटा हुआ है।
विवाद की वजह क्या रही?
फिल्म के ट्रेलर और किरदारों को देखने के बाद कई दर्शकों और संगठनों ने आरोप लगाया कि यह फिल्म सिख इतिहास से प्रेरित है, जबकि गिप्पी ग्रेवाल इसे काल्पनिक कहानी बता रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि यदि गिप्पी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) से पहले ही सलाह-मशविरा किया होता, तो विवाद से बचा जा सकता था।
अकाल : इंडस्ट्री की राजनीति भी बनी वजह?
सूत्रों का कहना है कि ‘अकाल’ पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की अंदरूनी राजनीति का शिकार हो गई। कई लोकप्रिय पंजाबी गायक और अभिनेता आपस में बंटे हुए हैं, और उनके मतभेद सोशल मीडिया पर साफ दिखाई दे रहे हैं। फिल्म को लेकर समर्थन और विरोध दोनों पक्षों से बयान सामने आ रहे हैं।
किरदारों और प्रस्तुतिकरण पर उठे सवाल
फिल्म में गिप्पी ग्रेवाल, गुरप्रीत घुग्गी और निमरत खैरा जैसे सिख समुदाय से जुड़े कलाकारों ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं हैं। लेकिन कुछ लोगों ने यह आपत्ति जताई है कि ये कलाकार अपने नामों में पारंपरिक रूप से ‘सिंह’ या ‘कौर’ का उपयोग नहीं करते, जिसे अपमानजनक माना गया।
इसके अलावा फिल्म में दिखाए गए डाकुओं को जिस तरह से स्टाइलिश और शक्तिशाली दिखाया गया है — वे अधिकतर मुगल सैनिकों जैसे लगते हैं, जिससे यह आरोप लगा कि किरदार ऐतिहासिक सिखों की जगह किसी और संस्कृति से प्रेरित लगते हैं। तुलना की जा रही है रणवीर सिंह की फिल्म पद्मावत के ‘अलाउद्दीन खिलजी’ की सेना से।
क्या गिप्पी को किरदार में अधिक ढलना चाहिए था?
गिप्पी ग्रेवाल ने दावा किया कि फिल्म पूरी तरह से काल्पनिक है, जिसमें हॉलीवुड-प्रेरित हथियार, टैटू और लुक्स शामिल हैं। फिर भी आलोचकों का कहना है कि अगर किरदार काल्पनिक भी था, तो भी गिप्पी को उसमें अधिक यथार्थ लाने के लिए दाढ़ी-बाल बढ़ाकर अभिनय करना चाहिए था।
हिंदी सिनेमा में बॉबी देओल (Animal), आमिर खान (Dangal) और रणदीप हुड्डा (Sarbjit) जैसे उदाहरण दिए जा रहे हैं जिन्होंने अपने किरदारों को वास्तविक दिखाने के लिए शारीरिक बदलाव किए।
दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
जहाँ एक ओर विरोध जारी है, वहीं कुछ दर्शक फिल्म की कोशिश और दृष्टिकोण की सराहना भी कर रहे हैं। फिल्म अब तक लगभग ₹10 करोड़ की कमाई के करीब पहुँच चुकी है, हालांकि यह आंकड़ा इसकी क्षमता से काफी कम है।
गिप्पी ग्रेवाल का स्पष्टीकरण
गिप्पी ने कहा, “मैंने यह फिल्म किसी की भावनाएं आहत करने के लिए नहीं बनाई थी। मेरा उद्देश्य पंजाबी सिनेमा को एक नई दिशा देना था।” Dharma Productions और Humble Motion Pictures द्वारा सह-निर्मित यह फिल्म अब एक उदाहरण बन गई है — कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर फिल्म बनाने से पहले, उचित परामर्श और सावधानी जरूरी है।
