मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और Donald Trump प्रशासन के दौरान Iran–US War के बीच बढ़े संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को गहराई से प्रभावित किया है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखा जा रहा है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।इसी स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने बड़ा कदम उठाते हुए समुद्र में मौजूद रूसी तेल पर लगी कुछ पाबंदियों को अस्थायी रूप से हटा दिया है।
रूसी तेल: ऊर्जा संकट से बदली अमेरिकी रणनीति
तेल की बढ़ती कीमतों और आर्थिक दबाव को देखते हुए अमेरिका को अपने कुछ पुराने फैसलों से पीछे हटना पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन ने समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल पर लगी कुछ पाबंदियों को अस्थायी रूप से हटा दिया है, ताकि वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाई जा सके और कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
इसी कड़ी में India को भी एक महीने के लिए Russia से तेल खरीदने की अनुमति दी गई है। माना जा रहा है कि इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और युद्ध के कारण बढ़ती कीमतों पर कुछ हद तक लगाम लग सकती है।
Iran–US War : ट्रंप प्रशासन की नई योजना
युद्ध से पैदा हुए आर्थिक दबाव को कम करने के लिए ट्रंप प्रशासन नए उपायों पर काम कर रहा है। अमेरिकी सरकार U.S. International Development Finance Corporation के जरिए लगभग 20 अरब डॉलर के मैरीटाइम इंश्योरेंस बैकस्टॉप की योजना पर विचार कर रही है। यह व्यवस्था समुद्र में मौजूद तेल के सुरक्षित परिवहन और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बनाई जा रही है।
Iran–US War : 11 अप्रैल तक दी गई अस्थायी छूट
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने समुद्र में मौजूद रूसी तेल के व्यापार पर लगी रोक को अस्थायी रूप से हटाते हुए इसे 11 अप्रैल तक के लिए अनुमति दी है। अधिकारियों का अनुमान है कि इससे वैश्विक बाजार में करोड़ों बैरल कच्चा तेल उपलब्ध हो सकता है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य सिर्फ वैश्विक बाजार में मौजूदा सप्लाई को उपलब्ध कराना है, ताकि युद्ध के कारण लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी कीमतों को काबू किया जा सके।
Iran–US War : रूस पर प्रतिबंधों में नरमी
यह फैसला उस नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है जिसके तहत Russia पर Russian invasion of Ukraine के बाद कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। इन प्रतिबंधों में रूसी तेल की कीमत पर सीमा तय करना और तथाकथित “शैडो फ्लीट” पर कार्रवाई शामिल थी, जिनका इस्तेमाल रूस प्रतिबंधों से बचकर तेल निर्यात करने के लिए करता रहा है।
वैश्विक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध का असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है। ऊर्जा कीमतों में उछाल, व्यापारिक अस्थिरता और सप्लाई चेन में रुकावट के कारण इसका असर एशिया, यूरोप और अमेरिका सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
अगर युद्ध लंबे समय तक जारी रहता है तो पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव में और इजाफा होने की आशंका है।








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